|
हिंदी वेबसाइट में आपका स्वागत है!
दिलीप कुमार

हिंदी ट्रेजेडी फिल्मों की बात निकले और दिलीप कुमार का नाम न आये ऐसा हो ही नहीं सकता। देवदास, गंगा जमुना, मुगल ए आज़म, संघर्ष..... न जाने कितनी ही ऐसी फिल्में हैं जिन्हें चाह कर भी भुलाया नहीं जा सकता।
दिलीप कुमार, जिनका असली नाम युसुफ ख़ान है, का जन्म पेशावर, जो कि अब पाकिस्तान में है, में सन् 1922 में हुआ था। युवावस्था में वे पूणे आ गये और वहाँ वे आर्मी केन्टीन में असिस्टेंट मेनेजर का काम करने लगे। कुछ रकम जमा हो जाने के बाद उन्होंने फल बेचने का धंधा करना शुरू कर दिया। बाद में वे बंबई (वर्तमान मुंबई) में आकर बस गये।
हिंदी वेबसाइट मेलिंग लिस्ट का सदस्य बनकर
"स्पोकन इंग्लिश मार्गदर्शिका" हिंदी ई-पुस्तिका मुफ्त में डाउनलोड करे!
कृपया ध्यान रखें - सदस्य बनने के बाद आपको प्राप्त होने वाले ई-मेल में हिंदी ई-पुस्तिका "स्पोकन इंग्लिश मार्गदर्शिका" मुफ्त डाउनलोड लिंक भी होगा। आपके इनबाक्स में यदि हमारा ई-मेल न दिखे तो उसे कृपया जंक फोल्डर में खोजें!
उन दिनों अशोक कुमार, जो कि बांबे टाकीज़ के हीरो हुआ करते थे, बांबे टाकीज़ छोड़ चुके थे और देविका रानी को एक नये हीरो की तलाश थी। युसुफ ख़ान से प्रभावित होकर देविका रानी ने उसे फिल्म ज्वार भाटा (1944) में हीरो का रोल दे दिया और उनका फिल्मी नामे दिलीप कुमार रख दिया। ज्वार भाटा को बांबे टाकीज की पिछली फिल्म किस्मत जैसी सफलता तो नहीं मिली पर दिलीप कुमार को बांबे टाकीज में रख लिया गया। उसके बाद उन्होंने बांबे टाकीज की फिल्में प्रतिभा (1945) और मिलन (1946) में हीरो का काम किया। पर एक फिल्म स्टार के रूप में वे सन् 1948 में प्रदर्शित फिल्म शहीद और मेला के बाद ही स्थापित हुये। सन् 1949 में मेहबूब ख़ान ने उन्हें अपनी फिल्म अंदाज, जिसमें राज कपूर और नरगिस भी थे, काम करने का अवसर दिया। अंदाज को आशातीत सफलता मिली और दिलीप कुमार भारतीय सिनेमा के ट्रेजेडी किंग के नाम से जाने जाने लगे। दीदार (1951) और देवदास (1955), जिनमें दिलीप कुमार की दुखांत भूमिका थी, भी लोकप्रिय फिल्में थीं।
अंदाज (1955), इंसानियत (1955), मधुमती (1958), पैगाम (1959), यहूदी (1958), मुगल-ए-आज़म (1960), गंगा जमुना (1961), लीडर (1964), दिल दिया दर्द लिया (1966), राम और श्याम (1967), गोपी (1970), सगीना (1974), बैराग (1976), क्रांति (1981), शक्ति (1982), विधाता (1982), कर्मा (1986), सौदागर (1991) और किला (1998) दिलीप कुमार की प्रसिद्ध फिल्में हैं। सन् 1959 में दिलीप कुमार और राज कुमार ने फिल्म पैगाम में एक साथ काम किया था। उसके बाद 32 वर्ष के बाद सन् 1991 में दिलीप कुमार और राज कुमार ने सुभाष घई के फिल्म सौदागर में फिर से एक बार अपना अभिनय कौशल दिखाया।
निःसंदेह दिलीप कुमार एक महान कलाकार हैं और उनके उत्कृष्ट अभिनय के लिये हमेशा उन्हें याद किया जायेगा।
दिलीप कुमार की प्रमुख फिल्में
- ज्वार भाटा - 1944
- प्रतिमा - 1945
- जुगनू - 1947
- नौका डूबी - 1947
- अनोखा प्यार - 1948
- घर की इज्जत - 1948
- मेला - 1948
- नदिया के पार - 1948
- शहीद - 1948
- अंदाज - 1949
- शबनम - 1949
- आरजू - 1950
- बाबुल - 1950
- जोगन - 1950
- दीदार - 1951
- हलचल - 1951
- तराना - 1951
- आन - 1952
- दाग - 1952
- संगदिल - 1952
- फुटपाथ - 1953
- शिकस्त - 1953
- अमर - 1954
- आजाद - 1955
- देवदास - 1955
- इंसानियत - 1955
- उडन खटोला - 1955
- मुसाफिर - 1957
- नया दौर - 1957
- मधुमती - 1958
- यहुदी - 1958
- पैगाम - 1959
- मुगल-ए-आज़म - 1960
- कोहिनूर - 1960
- गंगा जमुना - 1961
- लीडर - 1964
- दिल दिया दर्द लिया - 1966
- राम और श्याम - 1967
- आदमी - 1968
- साधु और शैतान - 1968
- संघर्ष - 1968
- गोपी - 1970
- सगीना महातो - 1970
- अनोखा मिलन - 1972
- दास्तान - 1972
- कोशिश - 1972
- फिर कब मिलोगी - 1974
- सगीना - 1974
- बैराग - 1976
- क्रांती - 1981
- शक्ति - 1982
- विधाता - 1982
- मज़दूर - 1983
- मशाल - 1984
- दुनिया - 1984
- कर्मा - 1986
- धर्माधिकारी - 1986
- कानून अपना अपना - 1988
- आग का दरिया - 1990
- इज्जतदार - 1990
- सौदागर - 1991
- कीला - 1998
|